इतनी शक्ति मुझे दो मेरे सतगुरु, तेरी भक्ति में खुद को मिटाता चलूं। (Sunday, June 1, 2014)
इतनी शक्ति मुझे दो मेरे सतगुरु, तेरी भक्ति में खुद को मिटाता चलूं।
चाहे राहों में कितनी मुसीबत पड़े, फिर भी तेरा दिया गीत गाता चलूं।
दूसरों के मदद की जरूरत नहीं, मुझको केवल तुम्हारी मदद चाहिए।
डगमगाये न मेरे कदम राह में, नाम तेरे का डंका बजाता चलूं।
नाव बोझिल मेरे पूर्व के पाप से, सो न जाऊं यही डर सताता मुझे।
चाह मुझको नहीं धर्म वा  अर्थ की, काम व मोक्ष की भी जरूरत नहीं।
धूल चरणों की मिलती रहे उम्र भर, तेरी महिमा निरन्तर सुनाता रहूं।
इतना वरदान दे दो मेरे देवता, खुद जगूं और जगत को जगाता चलूं।
मेरे जैसे अनेकों मिलेंगे तुम्हें, पर हमारे लिए तो तुम्हीं एक हो।
वैसे उलफत की मस्ती रहे हर घड़ी, तेरे कदमों में सिर को झुकाता चलूं।
मुझको गैरों के रिस्तों से क्या वास्ता, सिर्फ रिस्ता तुम्हारा निभाता चलूं। इतनी।