सतसंग की गंगा बहती है, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में। (Sunday, June 1, 2014)
सतसंग की गंगा बहती है, गुरुदेव तुम्हारे चरणों में।
फल मिलता है उस तीरथ का, कल्याण तुम्हारे चरणों में।
मैं जनम जनम तक भरमा हूॅं, तब शरण आपकी आया हूूूंॅ।
इन भूले भटके जीवों का, कल्याण तुम्हारे चरणों में।
दुखियों का दुख मिटाते हो, देव दिव्य परखाते हो।
सब आवागमन मिटाते हो, है मोक्ष तुम्हारे चरणों में।
एक बार जो दर्शन पाता हूं, बस आपका ही हो जाता हूं।
क्या गुप्त तुम्हारी प्रीति है, हैं धन्य तुम्हारे चरणों में।
जन्म का भूला शरण पडा, तब आय के तुम्हरे द्वार खड़ा।
काटो सकल बन्धन मेरा, निर्मल तुम्हारे चरणों में।