जय गुरू देव समाचार

जयपुर सत्संग 11.07.2014 प्रातः काल गुरू पूर्णीमा के अवसर पर....
जयगुरूदेव
 जयपुर सत्संग 11.07.2014 प्रातः काल गुरू पूर्णीमा के अवसर पर
    जयगुरूदेव, सर्वसमर्थ सर्वत्र स्मारणीय परम् पूज्य गुरू जी महाराज उपस्थित सभी गुरू बहन भाई बच्चे एवं बच्चीयों। सत्संग जल जब कोई पावे मैलाई सब कट-कट जावे, शरीर की सफाई साबुन और पानी से हो जाती है। कपड़े की धुलाई, मकान की धुलाई गाड़ी, घोडा की धुलाई साबुन से पानी से हो जाती है। लेकिन अर्तआत्मा की धुलाई नहीं होती है। इन सब चीजों से नहीं हो सकती है जब सत्संग मिलता तब अंतरआत्मा का धुलाई होती है। लोगों के अंदर बदलाव आता है देखो बाल्मीक जैसे डाकू सत्संग से बदल गये। संत्सग का वचन जब लंकनी को याद आया उसकी जान बच गई हनुमान जी जब लंका में प्रवेश कर रहे थे तो उस समय लंकनी ने रोका तो हनुमान जी ने एक मुठ्ठी उसके पर मार दिया और जैसे सिर पर मुठ्ठी मारा बस वो नीचे गिरे और उसके मॅू से खून बहने लग गया तो उसको ब्रम्हा की की वो बात याद आ गयी और हनुमान जी को अन्दर प्रवेश करने दिया।

इसीलिये पहले के समय में महीने में एक बार संतो के आश्रम में लोग जाते थे और उनसे सीखते थे की गृहस्थ आश्रम में कैसे रहा जाता था भाई-भाई के साथ कैसा वरताव किया जाता था, पिता पुत्र के साथ कैसा बरताव करें, पति-पत्नी का फर्ज क्या होता है इसकी जानकारी संतो ंके यहा जब लोगों को मिलती थी तो लोग घर छोड़कर के पागलों की तरह से झगड़ा झांझट करके भागते नहीं थे। घर में औरते झगड़ा झंझट से परेशानी मे ंजहर खा करके मरते नहीं थे।

गृहस्थ आश्रम को लोग स्वर्ग कहते थे। लेकिन जब विचारो में भिन्नता न हो जब इसमें एक जैसा खाना पान एक जैसा एक जैसे संस्कार हो एक पहनावा, एक जैसे बोली भाषा एक जैसे विचार एक जैसे रहन-सहन था तो यही गृहस्थ आश्रम को लोग स्वर्ग कहते थे और अलग एक जैसे विचार ना हो और इस तरह से परिवार की सोच हो जाती है तो लड़ाई झगड़ा हो जाता है गोली मार देते है बेटे को मरवा रहे बेटा बाप को गोली मार रहा है भाई-भाई के खून का प्यासा हो रहा है एक समय ऐसा था भी भाई-भाई के लिए जंगल चला गया था राम के साथ लक्ष्मण लेकिन अब भाई भाई के खून का प्यासा हो गया भाई-भाई को लट्ठ लेकर के खदेडता है गाली बक रहा है ये सत्संग का आभाव होता है जब सत्संग मिलता है तो लोगो को इस चीज की जानकारी होती है कि ये दुनिया की चीजे ये अपनी नहीं है ये घर मकान जो इन चीजों को इकट्टा करने में लगे हो ये अपना नहीं है इस लिये दिया गया ये मनुष्य शरीर देव दुर्लभ शरीर है देवता इसके लिए तरसते है कि साधना का इनमें रास्ता है साधक धाम मोक्ष कर द्वारा पाई न जो परलोक सवारा  तो परखदुख पावहि प्राणी सिर धुन-धुन पछताय कालहि कमहि मिथ्या दोष लगाए। ये साधना का घर है ये देह अगर नष्ट हो गया इसमें कोई तकलीफ आ गई तो साधना में दिक्कत आयेगी, भजन पूजन में दिक्कत आयेेगी इसलिए इसके लिए कुछ बना लो ठण्डी, गर्मी से बचत के लिए घर बना लो कपड़ा इसको ढ़कने के लिए कि ये रोगी ना हो जाए इसको चालने के लिए भोजन का इन्तजाम करदो अब इसलिए नहीं बनाया गया की बढि़या-बढि़या खाओ फिर इलाज कराओ सारा समय उसी में लगा दो घर मकान बनाने में ही जमीन जायजाद इकट्ठा करने में ही घर को ही बनाने में ही लगा देता है। घर की रंगाई पुताई करने सुन्दर सुडोल बनाने में ही हाथी घोडे़ में ले जाने के लिए ही पूरा समय 24 घण्टे का निकाल दो किसके लिए दिया गया किसके लिए दिया गया भई घरों रंगाई पेताई करके रखते है कि इसमें बैठकर के लोग मालिक को याद करते है इसी तरह से याद करने के लिए इस शरीर को दिया गया है। जो इस शरीर के लिए ही सब कुछ करते रहते है उनका समय बेकार जाता है और इस वक्त पर तो जुबान के लिए और अच्छा कपड़ा पहनेगे तो अच्छे गाड़ी घोड़े में चलोगे तो लोग सलाम करेंगे इनमें इस वक्त पर तो अच्छा लगेगा लेकिन अन्त दुख दाई यह तन कर विषयी न भाई और स्वर्गहि स्वर्ग अल्प दुखदाई। इनमें बहोत भयंकर तकलीफ होती है

यमराज के जब दूत आते है तो खाली करने के लिए तो ये जीवात्मा डर जाती है की जितना बकरा भेडि़या को देखकर डर जाता है। अन्त में बड़ी तकलीफ होती है इसलिए इसे साधना का घर पूजा का मंदिर आप लोगो को मिला इसका उपयोग करो। जो एक दूसरे का लेना देना है गृहस्त आश्रम का कर्जा है कर्जा कर्जा अदा कर लो अपने देश अपने घर से आये हुए बहोत दिन हो गया तृेता द्वापर कलयुक कितने बीत गये और अभी तक अपने वतन अपने घर अपने मालिक के पास नहीं पहुंच पाये ना मालूम कितनी बार नर्कोे में गये जीवात्मा चैरासी में चक्कर काटे ना मालूम कितनी बार माॅ के पेट मंे उल्टे लटकाये गये लेकिन अभी तक नहीं पहुंच पाये अब आप इस बात को समझो मनुष्य शरीर अगर चला गया बेकार गया इससे कुछ अपना काम नहीं किया समझ लो या तो चैरासी में से चले जाना पड़ेगा जब कई जनम हुए तो एक दूसरे का लेना देना ना मालूम कितनी बार माॅ बेटी बनी बेटी पत्नी बनी भाई बाप बना और बाप बेटा बना लेना देना तो रहेगा ही।


Updation On Friday, July 11, 2014