जय गुरू देव समाचार

11.06.2014 जयपुर राजस्थान सायंकालीन सत्संग....

11.06.2014 जयपुर राजस्थान सायंकालीन सत्संग..............

माता पिता की सेवा करनी थी तो दूर घर से निकाल रहे हमेशा माता पिता की सेवा करना परम् धर्म है मातृ पिता देवो भवः । धरती माता भी दुःखी है और गौ माता भी देखो जब मनुष्य अच्छा कर्म नहीं करता नेक कर्म नहीं करता अपना फर्ज अदा नहीं करता तब उस जीवात्मा को सजा भोगने के लिए कुत्ता, बिल्ली नर्क चैरासी में बन्द किया जाता है तो इस मनुष्य शरीर के पहले की जो योनी है वह गाय और बैल की योनी है गाउ माता को ये इसलिए नहीं मारते कि उनके बाद इनको मनुष्य शरीर मिल जाएगा सतगुरू मिल जाएगे तो रास्ता मिल जाएगा तो ये भजन करके पार हो जाएगे और उसको मार देंगे काट देंगे तो उसी में प्रेत योनी में चली जाएगी इसीलिए गाय को माता माना गया है। और गाय को मारना बहोत बड़ा पाप माना गया है बहोत बड़ा पाप और जितने भी महापुरूष ने गाय की सेवा की अपने कृष्ण भगवान को गोपाल कहा गया है गौ को चराते थे पालते थे नहलाते थे इसलिए उनका नाम गोपाल रखा गया है। इसलिए आप इस बात को समझो गाउ को पूजा गया गाय को माना राम ने भी ऋषि मुनियों ने भी गाउ को माना है क्यों कि ये बहुत सीधी होती है उसका जो दूध होता है अमृत तुल्य होता है किसी अन्य जीवों से परहेज नहीं करती आपनी माता तो दूसरे बच्चों को दूध नहीं पिलाती है अपने बच्चे को ही पिलाती है लेकिन गाउ माता सबको दूध देती है कोई भी उसके लिए भेद भाव नहीं हिन्दु का हो मुस्लिम का हो इसाई का हो इसीलिए वो गऊ कहलाती है उसे कोई परहेज नहीं गोबर से जब जमीन लीपी जाती है गांव में जब जमीन लीपी जाती है और किसी मुसलमान भाई को कहो तुम यहा नमाज मत पढ़ना क्यों की इसे गोबर से लेपा गया है क्यो तुमको कोई ऐतराज है? कहेगा कोई ऐतराज नहीं है। ये जमीन पवित्र हो गयी किसी से कहो मुसलमान से कहा ईसाइ से कहो की तुम गाय का दूध पियोगो तो कहेगा क्यों नहीं गाय का दूध अच्छा होता है इसको गाय का दूध हर आदमी इस्तमाल करता है इसलिए इसको माता कहा गया ये दूध सबको पिलाती है किसी से परहेज नहीं करती है। लेकिन माता दुःखी हो गयी कुछ लो मालिक को भूल गये जो मालिक पैदा होने से पहले माॅ के स्तन पर दूध भर देता है परवरिश वही करता है। देता वह है लेकिन उसको भूल गये तो गाउ माता का मान्स खाने लग गये मार करके तो बुरा आदमी भी अपने बच्चे को चाहता है वह बुरा ना बने बुरी औरत भी चाहती है की उसकी बेटी बुरी न बने तो आप को क्या हो गया हो गाय के मांन्स को खाने लग गये अंग्रेजो के जमाने में भी इतने स्लाटर हाउस नहीं थे जितने आज खुल गये।

अब गाय को कैसे मारते है वो भी बता दे गाय को पहले कई दिनों तक भूखा प्यासा रखा जाता है और फिर उस पर गरम पानी डालते है वो उसकी खाल फूल जाती है और वो तड़फ कर आगे बढ़ती है और और मशीन द्वारा उसकी खाल खींच ली जाती है और आगे मशीन से उसकी बोटी बोटी काट दी जाती है और  डिब्बे में पैक करके होटलो में भेज देते है। होटल में खाते समय कोई ध्यान रखता है की मांस गाय का है, सुअर का है, कि बकरे का है। कोई कच्चा मांस खा सकता है अरे चार घण्टे भी अगर मान्स को रख दिया जाए तो उसमें से बदबू आने लगती है और उसे घी जैसी चीज मंे भूजकर मिर्च मसाला लगा कर परोसा जाता है तब उसे खा पाते है।

जिसको गाउ माता कहो उसका मान्स खाना उचित है कभी नहीं यह पाप है और पाप सिर पर चढ़ कर बोलेगा और पाप में आदमी अन्धा हो जाता है और हर वो गलत काम करने लगता है और पशु हो जाता है आप एक कमरे के अन्दर गाय को चारा पानी देकर बन्द कर दो तो वे जुगाली करेगी गोबर देगी और सुबह जब खोलोगे तो बाहर आ जाएगी। और एक करमे में गौ मान्स डाल दो चार मान्साहारी कुत्ते को बन्द करदो तो रात भर भौ भौ करेगे और मान्स खा लेगे और जब सुबह दवाजा खोलोगे तो वो लहू लुहान रहेगे किसी का कान कटा है किसी का पूछ कटा है किसी का पैर कटा हुआ मिलेगा क्योकि मांन्स से खून गरम हेाता है  इस समय देश में लोगो का मान्स खाना और गौ हत्या करना यह शुभ संकेत नहीं है इसका परिणाम बुरा होगा कुदरत सजा देंगी लोगोको इसलिए इस सजा से बचाने के लिए लोगो को यह अभियान चलाया गया गुरूपूर्णिमा में यही से ये अभियान चलाया गया सभी लोगो से प्रार्थना किया गया देश के नेता मंत्रियों से एमपी, एमएलए,  मुख्यमंत्रि और प्रधान मन्त्रि, राष्ट्रपति सबसे प्रार्थना की गयी कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दीजिए गाय अगर राष्ट्रीय पशु घोषित हो जाएगी तो गऊ माता की जान बच जाएगी कुछ नहीं करना है आपको कोई भर्ती नहीं करनी है आपको कोई दफ्तर नहीं बनाना है आपको कोई भी पुलिस वाले को रात में ड़डा नहीं बजाना है। एक लाइन का कानून बना दीजिए की गाय राष्ट्रीय पशु है हमने भी प्रार्थना की एक साल बिता दिया अब जो ये नये प्रधानमंत्री बने है ये शाकाहारी है शाकाहारी इनके अन्दर की चरित्र का दोष की सूचना नहीं मिली है और ये देखा गया कि ये सभी धर्माे को एक समान मानते है समझते है जो मजहबी होता है वह सब धर्म मजहब का सम्मान करता है जो मजहबी होता है वो सब इन्सान की कद्र करता है इन्होने प्रधानमंत्री आवास में मान्स का बनना बन्द कर दिया है और कोई भी मेहमान आये तो उसे मान्स नहीं परोसा जाएगा। इनकी भावनाओ को देखते हुए इनसे उम्मीद लगी हुई है कि ये गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर सकते है आप जहां कही भी मैं अपने स्तर ये यह प्रार्थना करता हूं की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दीजिए और गाय को काटने वाले वो फासी की सजा मिले ऐसा नीयम बनना चाहिए। कुछ नहीं कोई भी गाय की हत्या करना पकड़ा जाए उसे फांसी की सजा होनी चाहिए तो ये प्रार्थना आज भी कर रहा हूॅ ये प्रार्थना आप भी अपने स्तर से कर दीजिए की गाय को मारने वाले को फांसी की सजा मिले। आप देख लीजिए जितने भी इलेक्ट्रानिक मीडिया के और प्रेस मीडिया के लोग है आप देख लो ये सब लोग चाहते है उठाओ हाथ देख लो ये भी चाहते है ये संदेश आप पहुंचा दीजिए और मैं भी पहुंचाउगा चिट्ठी लिखूगा आप सब लोग चिट्ठी लिख कर भेज दो हम गाय को राष्ट्रीय पशु बनाना चाहते है आप देश समाज के हित के लिए यह काम कर दीजिए अगर आपने ऐसा काम कर दिया तो बहोत से लोग पाप से बच जाएगे और कुदरत भी मौका देंगी आज गुरू पूर्णीमा के अवसर पर मैं प्रधानमंत्री जी से ये कहना चाहता हूॅ की ये जो न्याय और सुरक्षा आप के हाथ में है वो आप दे दीजिए रोजी रोटी मैं दिला दूंगा। इनको भजनानन्दी बना करके इनके आन्दर पाॅवर दिला करके जो इक्छा कीन्ही मन माही हरि प्रताप कुछ दुर्लभ नहीं जो इच्छा होगी वो पूरी करावयी जाएगी आप लोग इस काम को कर दीजिए मुख्यमंत्री को प्रधान मंत्री को आप यह चिट्ठी लिख दीजिए गाय को राष्ट्रीय पशु बना दें और ये नीयम बना दंे जो गाय को मार कर खाये उसे फाॅसी की सजा दी जाए। आप लोग जिन जिन गांव मंे नहीं पहुंच पाये हो उन गाव में भी जाकरकर के ये बता दो समझा दो समय ज्यादा नहीं बचा आप समझा दो सब कोई चिट्ठी भेज दो ये ध्यान दो बेगैर हड़ताल के तोड़ फोड़ आन्दोलन की जरूरत नहीं है हड़ताल और तोड़फोड़ करने से देश के विकास में बाधा आती है नुकसान होता है ये काम नहीं करना का है लोगो की इच्छा जगानेे की जरूरत है लोगो की इच्छा जगेगी तो ये करेंगे और अगर इन लोगो ने नहीं किया तो मेरे पास तरीका है मैं करा दूंगा आज से संकल्प बनाना ही है की गाय को राष्ट्रीय पशु बनाना है गाउ माता की जान बचाना है ये कानून बनाना ही है लेकिन भावुकता में आकर के केाई ऐसा कदम मत उठाना जो अपने नियमांे के विपरीत हो। वैचारिक परिवर्तन लाने की जरूरत है तो करेगे और ये नहीं  ये काम धीरे-धीरे हो जाएगा आप लग जाओ हो जाएगा उस मालिक की दया से काम हो जाएगी न हो ऐसा हो नहीं सकता गाउ माता की जान बचाना है उसे राष्ट्रीय पशु बनाना है। गाय की जान बचाना ही है उसे राष्ट्रीय पशु बनाना ही है।


Updation On Friday, July 11, 2014