जय गुरू देव समाचार

परम् संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की अपार दया मेहर से होली के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सत्संग समारोह ...
जय गुरु देव
परम् संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की अपार दया मेहर से होली के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय सत्संग समारोह 4,5,6 मार्च 2015 को बाबा जयगुरुदेव आश्रम , मक्सी रोड़ उज्जैन में निर्विघ्न और सफल सम्पन्न हुआ। जिसमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश्, हरियाणा, दिल्ली, उत्तराखण्ड, राजस्थान,म.प्र., महाराश्ट्र, बिहार, झारखण्ड, प.बंगाल, उडीसा, आन्ध्र प्रदेष, कर्नाटक सहित दूर- दूर से आये देष भर के लाखों सत्संगियों ने एवं आम नये परमार्थी जिज्ञासुओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, गौसेवकों एवं मध्य प्रदेष षासन में षिक्षा मंत्री श्री पारस जैन तथा उज्जैन से सांसद चिन्तामणी  मालवीय, विधायकों, राजनेताओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया और पूज्य बाबा उमाकान्त जी महाराज के नित्य प्रातः 6 बजे और सायं 5 बजे से हुये सत्संग कार्यक्रमों को सुनकर लाभ उठाया।
    अबकी बार साधना स्थल के पूर्व की तरफ बने विषाल मंच से सत्संग हुआ, तीन बिना दहेज एवं आदर्ष विवाह (षादियाँ) तथा विभिन्न प्रान्तों की बाबा जयगुरुदेव संगतों की बैठकें भी सम्पन्न र्हुइं जिसमें राश्ट्र व आत्महित के महत्वपूर्ण निर्णय लिए गये-
 4 मार्च 2015। प्रातः 6 बजे। प्रार्थना, सुमिरन, ध्यान और भजन कराने के बाद सत्संग की षुरुआत करते हुए पूज्य  महाराज जी ने कहा - गुरु महाराज की दया मेहर से हमें इस स्थान पर भजन ध्यान करने का मौका मिला। सुमिरन में अगर मन नहीं रूका तो सुमिरन का फल नहीं मिलता, ये मन बड़ा सैलानी हो गया। इसको घेर कर सुमिरन में लगाना पड़ता है।‘ सुमिरन की सुध यों करे, ज्यों गागर पनिहार। हाले डालै चित्त में, कहे कबीर विचार।‘ रूप, धुनि याद नहीं आ रही तो धनी खुष नहीं होते। इसलिए मन को रोकने की जरूरत है। जब मन उसमें लीन हो जाएगा तो उसका बराबर ध्यान बना रहेगा। तब फिर गुरु की पूरी दया उसमें आ समाती है। सुमिरन करने वाले को अपनी ताकत का जब अहसास हुआ तो साधक ने कहा अहम् ब्रम्हास्मी।
    एक बुगदादी नाम के फकीर थे। वो जब मालिक के सुमिरन में लीन हो जाते थे तब अपने मालिक में समा जाते थे।  मालिक में समाकर वो  ‘‘मम खुदाय’’ ऐसा बोले। तब उनके मानने वालों ने कहा कि आप तो कहते थे कि मालिक इस इन्सानी जामें में नहीं आते। तब उन्होंने कहा कि भाई मैंने तो कहा नहीं। इसलिए शरीयत के कायदे के मुताबिक सजा तब दे देना जब मैं दुबारा कहूं। मुझको तो पता ही नहीं कौन कहा? ऐसा होता है। साधना करने वालों का खयाल अन्तर्मुखी हो जाता है।
    ये भजन और भाव भक्ति किसी के लिए बँटी नहीं है। गृहस्थ आश्रम में रहते हुए नाम की साधना के द्वारा दुनिया से निकलने का रास्ता बहुत आसान हो जाता है। विरक्ति हो जाने पर लेना-देना चुकाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। सतगुरु के लोक में जो पहुंच जाते हैं उनको भी सतगुरु कहने लगते हैं। जैसे पंडित के बच्चे को भी पंडित और उसकी देवी (घरवाली) अनपढ़ घर वाली को भी पण्डिताइन कहते हैं।
    जब-जब संत आये तब उन्होंने वर्णात्मक नाम को जगाया। ऐसे ही गोस्वामी जी महाराज ने कहा - ‘नाम रहा संतन आधीना। संत बिना कोई नाम न चीन्हा।‘ नाम वक्त के सन्त सतगुरु की मौज पर होता है।
महाराज जी ने आगे कहा कि ये जो बारिश ज्यादा हो रही है,ओला पत्थर गिर रहें हैं, फसलें खड़ी-खड़ी गिर रही हैं, आँधी आफत आ रही, लड़का खत्म हो रहा है, जवान लड़का ही मर रहा है, ये अपने ही कर्मों की सजा मिल रही है।
एक सेठ बड़ा कृपण था। कृपण कहते हैं कन्जूस को। कृपण का धन ही सब कुछ होता है। ये ब्याज वसूलने वाले लोग ब्याज वसूली में बड़े क्रूर हो जाते हैं। सूदखोर अपने लड़के और औरत के साथ भी ऐसा ही व्यवहार करते है एक बार जब आदमी गलती करता है तो गलती करता चला जाता है, उसको फिर गलती करने में संकोच नहीं होता  लेकिन गरीब लोग सैद्धान्तिक होते हैं।  उसूल के पक्के होते है। संत मत में ब्याज लेना वर्जित किया यानी मना किया गया। ब्याज लेने वाले का परमार्थ नहीं बनता। आपने सुना होगा -
                   चोरी जूआ मसखरी, ब्याज घूस पर नार। जो चाहे दीदार को, ऐति चीज निवार।।      

 महाराज जी ने सुनाया कि एक बहुत ही गरीब और लाचार व्यक्ति जब अपना कर्जा नहीं चुका पाया तब सेठ ने दबाव डालकर उसका जो भी सामान था उनको गठरी में बाँधा तो बोझा ज्यादा हो गया। अब उसको उठा कर ले जाना मुष्किल हो गया और गाँव वालों को पता लगा तो कोई भी आदमी कुली बनकर लाचार गरीब का सामान उठाकर सेठ के साथ तैयार जाने को तैयार नहीं हुआ तो सेठ लज्जा वष छोड़कर भी नहीं जा सकता तब तक  उधर से एक महात्मा जी उधर आये और सेठ से परेषानी पूछी फिर कहा कुछ बोझा तो मैं उठा लूँगा लेकिन बोझा तो तुमको उठाना ही पडे़गा। ऐसा ही हुआ। जब दोनो लोग उठाये चलने लगे तो महात्मा जी ने कहा कुछ सुनाओ तो यात्रा आसानी से कट जाये तब सेठ ने कहा सुनाना तो महात्माओं का काम होता है आप ही सुनायें। महात्मा सत्संग सुनाते घर के नजदीक पहुँचा दिया। जब सेठ जी का षरीर छूटा यमदूत के सिपाही मारते घसीटते चीखते चिल्लाते हए सेठ की जीवात्मा को ले जाकर धर्मराज के यहाँ पेष किये तब धर्मराज ने कहा कि तुमने अपने जीवन में एक महात्मा के साथ चलते चलते सत्संग सुना और तो कोई पुण्य नहीं। तब सेठ ने उसी पुण्य का फल लाभ पहले देने को कहा तो धर्मराज के आदेष पर सिपाही उन्ही महात्मा के पास कुछ समय के लिए सेठ को लेजाकर दूर से ही छोड़ दिया, वहीं सत्संग हो रहा था। जमदूत के सिपाही महात्मा के सत्संग को सुन रहे, ब्याज खोर सेठ को इषारे से तो बुलाते रहे लेकिन सामने और पास तो आ नहीं सकते थे, उधर महात्मा जी सत्संग सुनाते रहे और इषारे से उसको रोकते रहे, अन्ततः जमदूत ने कहा ये अब संत का (जीव) हो चुका अब तुम लौट आओ। इस प्रकार उसकी बचत हो गई। इसलिए हमेषा गुरु का ध्यान करना चाहिए। घिरी बदरिया पाप की, झर-झर गिरत अंगार!! संत न होते जगत में, जल मरता संसार।।

      महाराज जी ने सुनाया कि गुरु महाराज के लिए जिसने सर्व समर्पण कर दिया, गुरु महाराज ने उसका काम कर दिया। सन्त का जगह-जगह दरबार लगता है हर मण्डलों में।

                               राम झरोखे बैठकर सबका झाडा लेय। जिसकी जैसी चाकरी, वैसा ही फल देय।।

जो गुरु के आदेष पर मरने मिटने वाले होते हैं, वो भले ही घर गृहस्थी के काम के कारण देर से आते हैं, लेकिन उनकी भाव भक्ति अलग तरह की होती है। सुमिरन रोज करो और उसके धनी को याद करो और अगर उसकी याद नहीं आ रही है उनके रूपों पर यह मन रूक नहीं रहा है। दृश्टि टिक नहीं रही है तो वो धनी खुष नहीं होते हैं। इसलिए जब सुमिरन जिसके भी नाम का किया जाये उसके रूप को याद किया जाये। इसलिए मन को रोकने की जरूरत होती है। अब यह है कि इसकी भगने की आदत बन गयी है। धीरे-धीरे जब कोषिष करेंगे, तो यह रूकने लग जायेगा और जब यह रूकने लग जायेगा तो यह उसी में लीन हो जायेगा। तब उस मालिक की दया बराबर इसी मनुश्य मंदिर में आती रहेगी और यह समझ लो यह बिल्कुल तदरूप उसी का हो जायेगा। उसी रूप का हो जायेगा। ‘न गुरु न चेला, सब में बोले एक अकेला।‘ यह कब ऐसा होता है जब सुरत गुरु स्थान पर पहुंच जाती है और गुरु के रूप को देखती है और गुरु इसके साथ दया करके इसमें जब समाते हैं तो गुरु जैसी ही हो जाती है। पूरी पावर उस मालिक की आ जाती है। जैसे यह तार को बाहर से देखने में समझ में नहीं आता है, लेकिन उसमें जब बल्ब लगा दिया जाता है और करंट लगा दिया जाता है तो वह बल्ब जल उठता है। महाराज जी ने साधना करते करते अंधेरा जहां रहता है वहां रोषनी हो जाती है। ऐसे ही बाहर की आंखों को बंद करते हैं तो अंधेरा रहता है लेकिन जब बाहर से आंखों को बंद करने पर जब गुरु की दया उस मालिक की दया इस षरीर में जारी हो जाती है तो रोषनी हो जाती है। यानी की पूरी ताकत उस मालिक की आ जाती है।
    अब आप इस बात को समझो, ये सहारा देते हैं, सहारा बना देते हैं। भक्तों के बस में कहा गया है भगवान होता है मालिक जिसका रक्षक होता है उसका कोई कुछ कर पाता है। यही कारण है कि समय-समय पर जब भी महापुरूश आये, उन्होंने लोगों के लिए एक वर्णात्मक नाम भी जगाकर लोगों की रक्षा के लिए छोड़ा जैसे आप देख लो राम भगवान जो आये थे उन्होंने भी कई रास्ते बताये और गुरु महाराज ने भी बताया और हम लोग भी उसी चीज को बता रहे हैं। नाम रहा संतन आधीना और संत बिना कोई नाम न चीन्हा। जिस नाम में वो ताकत भर देते हैं। वक्त के महापुरूश वो नाम ताकतवर हो जाता है। षक्तिषाली हो जाता है। उस नाम में पावर आ जाती है। उस समय राम नाम में पावर थी। राम नाम था उस समय, राम नाम में षक्ति थी उस समय। और देखो आपको याद होगा लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए राम जा रहे थे तो उस समय पर समुद्र में पुल बनाने की जरूरत पड़ी थी तब पत्थर पर राम नाम लिखकर के समुद्र में डाला गया था सारे पत्थर तैरने लगे थे। इतनी षक्ति थी राम नाम में। लेकिन जब द्वापर आया तो द्वापर में वो षक्ति बदल गयी। यह कहा गया नाम रहा संतन आधीना और संत बिना कोई नाम न चिन्हा। वक्त के संत, वक्त के महापुरूश की मौज पर होता है। नाम को रखना और नाम को बदलना ये उनकी मौज पर होता है। जयगुरुदेव जाग्रत नाम है, कभी षंका कत करना।         
       इस धरती पर दुष्टों और महापुरुषों का इतिहास यादगार रहा है। लोगों के हित के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन बिता देने वाले समय के परम्् संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के जीवन में कुछ ऐसा समय आया जिससे धार्मिक लोगों को बड़ी तकलीफ हुई लेकिन 23 मार्च 1977 का दिन प्रेमियों में खुशी की लहर लेकर आ गया। तभी से प्रेमीजन 23 मार्च को मुक्ति दिवस के रुप में मनाते हैं।  
 इसे मनाने तरीका-
    23 मार्च को प्रार्थना पाठ के साथ प्रातः 8 बजे से पहले ‘‘जय गुरु देव  ‘ ध्वजा फहराते हैं और दिन में 3 बजे तक उपवास रखते हैं और सत्संग, नगर फेरियों, षोभायात्रा, प्रचार यात्राओं का आयोजन  किया जाता है। सात दिन बाद 30 मार्च को प्रातः प्रार्थना पाठ, ध्यान, भजन के साथ उतार कर रख लिया जाता है ।
    बाबा जयगुरुदेव संगत प.बंगाल के अध्यक्ष श्री राजेन्द्र कुश्वाहा जी (मो. 94331840030) ने कहा कि 22 व 23 मार्च 2015 को डेडी ग्राउण्ड, चितरंजन रोड़, नियामतपुर, आसनसोल  प.बंगाल में सत्संग व नामदान होगा। यह सतसंग स्थल जी. टी. रोड़ पर  अग्रवाल नर्सिंग होम के पास रेल्वे स्टेषन से लगभग 10 की.मी. दूरी पर स्थित है। मुक्ति दिवस पर विस्तार से जानकारी देने के लिए बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकान्त जी महाराज जिन्होंने देश में गऊ हत्या, पशु पक्षियों की हत्या बन्द करा करके लोगों को शाकाहारी, सदाचारी, ईश्वरवादी, नशे से मुक्त करके धरती से पाप हटाकर धर्म की स्थापना कराने का संकल्प ले रखा है, ऐसे बाबा उमाकान्त जी महाराज सत्संग व नामदान  (इसी मनुष्य शरीर में देवी देवताओं का दर्शन करने का सीधा सरल रास्ता)  देने के लिए आ रहे है।  
          महाराज जी ने बताया कि  ‘‘आगे का समय बहुत खराब है लूट पाट, चोरी, बेईमानी, ठगी, बलात्कार, अपहरण, हत्या, आगजनी, डकैती, भूकम्प, आँधी, तूफान व नई-नई बीमारियाँ आदि का प्राकृतिक प्रकोप बहुत बढ़ेगा। बचने का क्या उपाय होगा ? समय से पहुँच कर सत्संग में आकर सुन लीजिए। यह मजहबी जलसा सभी कौम- कौमियत वालों के लिए है। किसी के लिए कोई परहेज नहीं। सभी लोग इसमें शरीक हो कर लाभ ले सकते हैं।
    
 अगली पूनम चैत्र पूर्णिमा  बाबा जयगुरुदेव संगत गुजरात के अध्यक्ष श्री अषोक भाई त्रिवेदी (मो. 9909918837) ने बताया 2-3 अप्रैल को  भगवान कृष्ण की भूमि द्वारिका धाम गुजरात में परम् संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकान्त जी महाराज का आगमन होने जा रहा है। लोगों के खानपान व चरित्र खराब होने की वजह से बुद्धि भ्रष्ट हो रही है। पाप कर्म करने लग गये। सजा देने के लिए कुदरत बिल्कुल तैयार खड़ी है। कर्मों की सजा से लोग बच जाँय, इसके लिए महाराज जी उपदेश करने आ रहे हैं। इसी मनुष्य मन्दिर में भगवान से मिलने का, देवी-देवताओं के दर्शन करने, अनहद वेद वाणी , मस्ताना बाजा जो चैबीसों घण्टे बज रहा उसको सुनने का रास्ता भी बतायेंगे। बीमारी, तकलीफ, कष्टों में राहत कैसे मिलेगी? सत्य, अहिंसा तथा परोपकार रुपी धर्म कैसे आयेगा?  दैवी प्रकोप में जान माल की रक्षा कैसे होगी? सतयुग कैसे आयेगा बाबाजी बतायेंगे।
    श्री अषोक जी ने बताया की यह कार्यक्रम एन.डी.एच. क्रिकेट ग्राउण्ड, बडकेश्वर महादेव रोड, द्वारिका में समुद्र तट पर बहुत विषाल मैदान में आयोजित होगा।  
    ओखा जाने वाली सभी सवारी रेलगाडियाँ देवभूमि द्वारिका नाम के स्टेषन पर ठहरती है।

आगे 4 अप्रेल षनिवार को गाजियाबाद में तथा 11-12 अप्रेल को बिहार में पूज्य महाराज जी का सत्संग कार्यक्रम बन गया है।
            
                                                                               जयगुरुदेव
                    तृतीय वार्शिक भण्डारा ‘गुरु की दया का भण्डार खुलेगा। जो ले सकेंगे, मालामाल हो जायेंगे।‘

महान्् संत बाबा जयगुरुदेव जी महाराज की तृतीय पुण्यतिथि ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी तदनुसार 16 मई 2015 पर उज्जैन 14 से 16 मई 2015 तक  में भण्डारा होने जा रहा है। सन्त सतगुरु के इस भण्डारे में उनके दया दुआ का भण्डार खुलेगा। जो दया के घाट बैठेंगे, छक छक कर पीकर तृृप्त होंगे। कितने रोगियों के रोग  में फायदा होगा। दुनिया की सुख सुविधा होते हुए भी दिल को मानसिक शांति नहीं मिल रही, कार्यक्रम में पहुंचने पर शांति मिलेगी। लोगों के बुरे कर्मों से नाराज होकर कुदरत सजा देने जा रही, उसमें बचाव होगा। ऐसे लाभ के अवसर कम मिलते हैं। मिल जाये तो पूरा लाभ उठाना चाहिए।
    देश में गऊ हत्या बन्द कराने तथा सभी प्रकार की हिंसा जैसे और भी सारे पाप को इस धरती से समूल नष्ट करने, धर्म की स्थापना करके सुख शांति लाने का जिन्होंने संकल्प ले रखा है, ऐसे बाबा जय गुरु देव जी महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बाबा उमाकान्त जी महाराज सत्संग देंगे और इसी मनुष्य मंदिर में भगवान के मिलने यानी खुदा के दीदार का आसान तरीका भी बताएंगे। समझकर जो लोग करेंगे उनको तुरन्त लाभ मिलेगा। पहचान मिल जाने पर शंका नहीं रह जायेगी।
    इस पर्चे को पढ़ने वाले आप सभी लोग शाकाहारी रहेंगे, लोगों को बनाएंगे। शराब न पीजिए न पिलाइए। चरित्रवान बन जाइये। क्योंकि -                               
                                                        कुदरत है नाराज खड़ी।  आगे तबाही बड़ी-बड़ी।।
                                                       जो रूहों पर रहम करेगा।  वही खुदा का प्यारा है।।

           यह जलसा सभी जाति-मजहब के लोगों के लिए है। इसमें सभी लोग सम्मिलित हो सकते हैं। फायदा सबको होगा।  
परिवार इष्ट मित्रों सहित पहुंचकर लाभ लीजिए। महाराज जी ने कहा है कि सत्संग का समय प्रातः 5 बजे तथा सायं 7 बजे रहेगा। साथ ही आदेष दिया है कि  पतली मोमजामा और अपना जल पात्र ( कट्टी) भी साथ में रखें ।

               6.03.2015 को प्रातः 6 बजे के सत्संग के अन्त में  महाराज जी ने कहा कि कोई आदमी ऐसा न रह जाय जिसको यह पता न चल जाये कि ‘जयगुरुदेव वालों का गऊ हत्या रोकने का अभियान चल रहा है और आप ने कहलवा ही लिया कि गऊ काटना बन्द होना चाहिए। इसी में काम हो जाएगा। अब काम होना षुरु हो गया। कैसे? महाराश्ट्र में गऊ हत्या पर प्रतिबन्ध लग गया। ऐसे ही और...... अन्य राज्यों में भी..... और मोदी जी ने जिस दिन ऐलान कर दिया - गऊ राश्ट्रीय पशु है उसी दिन गऊ रक्षा का प्रचार बन्द हो जाएगा। इसलिए आप ऐसा न सोचें कि खेती या और कोई काम पूरा करने के बाद प्रचार में जायेंगे।     समय किसी का इन्तजार नहीं करता ।  जो समय के साथ नहीं है चलते उनको फिर पीछे पछताना पड़ता है। हनुमान अकेले लंका में गये थे, राम का, धर्म का झंडा गाड कर आये।

परिवर्तन होगा!
और मैं चाहता हूँ ज्यादा से ज्यदा लोगों को बचा लिया जाए।ऐसा परिवर्तन होगा कि लोग सोच भी नहीं सकते और आप लोगों से करवा देंगे। आपके षब्दों में , आपकी बोली में गुरु महाराज ऐसी षक्ति भर देंगे कि लोग आष्चर्यचकित होकर सुनते रह जायेंगे। पैसों के बगैर कोई काम नहीं रुकेगा। ये मत सोचना खर्चा कैसे, कहाँ से आयेगा? कुछ संगतों के जिम्मेदार सेवा आगे के कार्यक्रमों में खर्च करने के लिए बचा कर रखने की इच्छा रखते हैं यह अच्छा नहीं है। नीयत सही रक्खो किसी चीज की कमी नहीं रहेगी। अरे पैसा क्यों मांगते हो! काम बता दो। आप गुरु महाराज  के पक्के रंग में रंग जाओ वर्ना दुनिया बहुरंगी है उसका रंग अगरचढ़ गया तो उतरना मुष्किल है। इसलिए आज होली के दिन गुरु की दया की मिट्टी का तिलक लगाओ। और इतना जोर से न लगाना के किसी की चमड़ी छिल जाये। और आप सब अपनी गल्तियों की गुरु महाराज से और आपस में माफी माँगो। हम भी अपनी गलती की आप सब से माफी माँगते हैं सत्संग के अन्त में प्रार्थना की बुलवायी गई-

                 सत्गुरु षान्ति वाले तुमको लाखों प्रणाम! भक्तों के रखवाले तुमको लाखों प्रणाम!!   जयगुरुदेव

फिर सत्संगी भाई लोगों ने आपस में गल्तियों की माफी मांगी और गुरु की दया की मिट्टी का तिलक लगया।


Updation On Thursday, March 5, 2015