जय गुरू देव समाचार

बाबा उमाकान्तजी महाराज के सानिध्य मे अविस्मरणीय रहा गुरू पूर्णिमा महोत्सव
पेट में जीव को सब ज्ञान रहता है
माँ के गर्भ में जीव को उल्टा लटकना पड़ता है, उस समय उसे पिछले जन्मों की सारी रील दिखाई पड़ती है, कि किस-किस योनि में उसे कितनी तकलीफ सही और नर्कों में कितना दुख सहा सब दिखाई पड़ता है और उस मालिक का भी दर्शन होता है तथा उसकी आवाज भी सुनाई पड़ती है। तब वह जीव मालिक से विनती करता है कि मुझे इस पेट रूपी नर्क से बाहर निकालो। मैं बाहर निकलकर सच्चे सतगुरू को खोजकर, उनसे आत्म कल्याण का रास्ता नामदान लेकर 24 घण्टे भजन करके अपनी आत्मा का काम करूंगा, लेकिन बाहर आकर माया का पर्दा पड़ने पर वह सब भूल जाता है और बहुत पाप करने लगता है।
जीव गृहस्थी में फंस रहा है

भगवान ने भोग बनाये भोगने के लिये फंसने के लिये नहीं बनाया है। लेकिन इस समय लोग संसार से निकलने के तौर तरीका को भूल गये और जिब्हा, नभ्या के स्वाद में खाने-पीने व मौजमस्ती में ही लगे रहते है। सब कुछ इस शरीर के सुख सुविधा के लिये ही करते रहते  है । आत्मा के लिये कुछ नहीं करते हैं। इससे तमाम तरह के शारीरिक, मानसिक और आत्मिक कष्ट भोग रहे है और अन्त में शरीर छोड़कर जाने पर नर्क चैरासी में जाकर असहनीय तकलीफ सह रहे हैं।

मालिक जिसको मिला इसी मनुष्य शरीर में मिला

चाहे सन्त, महात्मा हो या सतगुरु हो सबको मालिक जीते जी इसी मनु‛य शरीर में ही मिला। मरने के बाद किसी को मालिक न मिलता है, न मिला है और न कभी मिलेगा। जिन्होंने पाया उन्होंने उनका रूप, रंग, आवाज, स्थान ग्रन्थ, पुराणों एवं धार्मिक किताबों में लिख दिया। लेकिन बिना सतगुरु के मालिक के पाने का भेद नहीं मिलता है। क्योंकि सतगुरु मालिक के ही तदरूप होते हैं और उस मालिक के पास आते जाते हैं। इसलिये वे दूसरों को भी मिला देते हैं यानी उनके पास पहुँचा देते हैं। तब जीवात्मा का जन्म मरण से छुटकारा होता है। केवल मुक्ति मोक्ष से ही उद्धार नहीं होता है।

मान्स, शराब के सेवन से पूजा इबादत कुबूल नहीं होती है
मनु‛य शरीर भगवान का बनाया हुआ मानव मन्दिर, मस्जिद की तरह से है। जब लोग इसमें मान्स, मछली, अण्डा, शराब डालने लगते हैं तो ये मानव मन्दिर शमसान घाट बनकर अषुद्ध हो जाता है। तब इस मानव मन्दिर में ना तो पूजा इबादत कबूल होती है और ना ही भगवान का दर्षन, दीदार होता है। इसलिये लोगों के पूजा, इबादत, धार्मिक आयोजन करते रहने पर भी उनकी परेशानियां, तकलीफें कम होने का नाम नहीं ले रही है, बल्कि बढ़ती ही जा रही हैं। इसलिये लोगों को पहले शरीर पाक साफ रखने के लिये शाकाहारी, सदाचारी, नषामुक्त रहना चाहिये तभी घर, परिवार, समाज, देष एवं स्वयं की आत्मा का भला कर पायेंगेे।

सन्तों का सिर्फ एक निशाना होता है
जब सन्त धरती पर कुल मालिक की पूरी पावर लेकर आते हैं तब उनका एक ही लक्ष्य होता है कि जीवात्माओं को उनके सच्चे घर, सच्चे पिता, उस कुल मालिक के पास पहुँचाना। इसीलिये कहा गया है कि ‘‘हम आये वही देश से जहाँ तुम्हारा धाम तुमको घर पहुँचावना एक हमारा काम’’।

सन्त सतगुरु अपनाये हुये जीवों को छोड़ते नहीं हैं
सन्त सतगुरु जिन जीवों को नामदान देते है, उनको जन्म-मरण से छुटकारा दिलाये बिना छोड़ते नहीं हैं। वे उनकी जीवात्मा पर मुहर लगा देते है तो खराब समय में उन जीवों की अकाल मृत्यु नहीं होती है और ना ही यमराज के दूत उन जीवों को छूते हैं, क्योंकि जिन जीवों को नामदान मिल जाता है सतगुरु उन जीवात्माओं के अच्छे, बुरे कर्मों का चिटठा यमराज के दरवार से फाड़ देते हैं फिर उन जीवात्माओं को नर्क, चैरासी में नहीं जाना होता है। जो जीव नामदान लेकर भजन भी नहीं करते हैं लेकिन जीवनभर षाकाहारी रहते है वे जीव मनु‛य षरीर के अधिकारी हो जाते हैं। इसीलिये कहा गया है पापा, पुण्य जब दोनों नासहिं तब मम पुर वासहिं

तीसरा नेत्र खुलने पर भगवान का दर्शन होता है
मनु‛य षरीर को देव दुलर्भ शरीर इसीलिये बताया गया है कि चैरासी लाख योनियों में से केवल इसी षरीर में भगवान से मिलने का रास्ता गया और किसी भी शरीर में भगवान से मिलने के रास्ता नहीं गया है। जब तीसरा नेत्र खोलने का भेद मिल जाता है तब ये सभी देवी, देवता ,भगवान, खुदा सब सामने दिखाई पड़ते हैं। जब तक तीसरा नेत्र नहीं खुलता कितना भी पाठ पूजा, इबादत, कथा, भागवत, तीर्थयात्रा करो वह भगवान नहीं मिलता है।

सतगुरु के दरबार में सब चीज होती है
सतगुरु के दरबार में हर चीज मिलती है। उन्हें किसी के भी प्रारब्ध को बदलने तक का भी अधिकार होता है। जब लोग इनके बताये हुये रास्ते पर चलने लगते हैं तो जिनके प्रारब्ध में जो चीज नहीं होती है, उसको भी दे देते हैं। यह पावर देवी-देवताओं को नहीं होता है। इसीलिये कहा गया है कि सन्तों की महिमा अनन्त, अनन्त किया उपकार ।

सफेद एवं काले कोट वालों से सदैव बचना चाहिये
कहा गया है कि कम खाओ, गम खाओ, छोटे बन जाओ तो इन दोनों कोट से बच जाओगे। सफेद कोट यानी डाॅक्टर साहब लोगों के पास ना जाना पड़े इसके लिये भूख से एक रोटी कम ही खाओ तो कभी कोई बीमारी नहीं होगी और काले कोट यानी वकील साहब लोगों के पास ना जाना पड़े तो कोई कुछ कहे तो बर्दाष्त कर लो। तब कोर्ट कचहरी के चक्कर नहीं लगाना पडेगा।

बरकत बड़ी चीज होती है
लोगों का खान-पान, आचार-व्यवहार, विचार बदल जाने से कर्म खराब हो गये। इससे कुदरत ने लोगों की खास चीज बरकत को बन्द कर दिया। अब लोग दिन रात कमाते हैं पर पूरा ही नहीं पड़ता है, क्योंकि बरकत बन्द हो जाने पर किसी को
करोड़ों रूपये भी दे दिये जाये तब भी उसका कार्य पूरा नहीं पड़ता है और जिसे बरकत मिल जाती है उसका थोड़े में ही पूरा पड़ जाता है और उसमें से कुछ बच भी जाता है। और किसी चीज की कमी नहीं होती है।

अपना पेट भरने के लिये किसी बेजुबान का खून बहाना कहाँ की इंसानियत है ताकत केवल शाकाहार से आती है जब से शाकाहरी हुआ तब से ज्यादा स्वस्थ रहता हूँ वैष्विक षांती के लिये मांसाहार और नशा बंदी जरूरी बाबा जयगुरूदेव जी का शाकाहारी  मिशन ही अंतिम उम्मीद है मांसाहार और नशा मुक्ति भारत के निर्माण की राजनैतिक मंच पर भी सभी से शाकाहरी होने की अपील करूंगा -कैलाष परमार संसदीय सचिव और विधायक उक्त विचार गुरूपूर्णिमा के अवसर पर बाबा उमाकान्तजी माहाराज के सानिध्य में मनाये जा रहे 2 दिवसीय आध्यात्मिक गुरूपूर्णिमा उत्सव में आयोजित शाकाहार सम्मेलन में  विभिन्न राजनैतिक, प्रषासनिक अधिकारियों और समाजसेवियों ने कही । शाकाहार के फायदे, मांसाहार से नुकसान के प्रति जागरूगता, भारत ही नहीं सम्पूर्ण विष्व में इंसानो  को शाकाहारी कैसे बनाया जाये इस विषय पर आयोजित इस शाकाहारी सम्मेलन में राजस्थान प्रांत के प्रमुख वैद रामकरण षर्मा ,म.प.्र संगत अध्यक्ष सत्यजीत सिंह देषमुख, रा‛ट्रीय मीडिया प्रभारी सुनील कौषिक सहित अनेक संस्था के जिम्मेदार मौजूद थे। इस अवसर पर पधारे संसदीय सचिव और क्षेत्रिय विधायक कैलाष परमार ने कहा कि मैं शाकाहारी हूँ और इसके फायदे जानते हूँ इसलिये युवाओं को प्रेरित करता हूँ। शाकाहारी बनने के लिये और मैं यहाँ सकंल्प लेता हँू कि बाबा जयगुरूदेव के इस मिषन को पूरा सहयोग करूंगा और राजनैतिक मंचांे पर भी सबसे शाकाहारी होने की अपील करूंगा। अन्य वक्ताआंे ने भी शाकाहारी क्लब बनाने, गर्भवती महिलाआंेे को शाकाहारी बनाने जिससे आनेवाले बच्चे पर संस्कार पडे़, पढ़ाई में शाकाहार के महत्तव को  शामिल करने जैसे सुझाव दिये। महाराज जी से दया दुआ बरक्कत पाने के लिये भारत ही नही विदेषो से भी भक्तो का सैलाब मैदान पर मौजूद है जो महाराज जी की एक झलक पाने को बेताब रहता है छोटे छोटे बच्चे जिस सेवा भक्ती से महाराज जी के दर्षन करने और सतसंग को सुनते है जो दॉृय बाबा के प्रति भावनात्म जुड़ाव को प्रदर्षित करता है। मेला मैदान में मौजूद भक्तों के सैलाब ने जयपुर के अन्दर बाबा जयगुरुदेव नगर बना दिया है।

महाराज जी की भविष्यवाणियां
सतसंग के अन्त में महाराज जी ने कहा कि शराब और मान्स को यदि पचास प्रतिषत अपराध अभी खत्म हो जायेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो आगे प्रकृति कुदरत सजा देगी तो भारी जन और धन हानि होगी। इसलिये हम यह चाहते है कि जनधन हानि कम हो और अच्छा समय आ जाये। संविधान में भारी परिवर्तन की जरूरत है और वर्तमान परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाये।

कुल मिलाकर वीरों की भूमि जयपुर में बाबा उमाकान्त जी महाराज के सानिघ्य में मनाया गया यह गुरु पूर्णिया आध्यात्मिक महोत्सव ऐतिहासिक और अविस्मरणीय रहा।

Updation On Sunday, July 9, 2017