लघु बुद्ध कथा (Wednesday, May 7, 2014)

जब भगवन बुद्ध ने धर्म प्रचार प्रारंभ किया तब उन्होंने अपने प्रेमियों से कहा कि वे भी उनके सन्देश को जन जन में पंहुचा दे. उनके प्रेमियों ने सहर्ष उनकी आज्ञा को स्वीकार कर लिया . जब उनके शिष्य धर्म प्रचार करने के लिए जाने को तैयार हुए तो उन्होंने एक शिष्य को बुलाकर पूछा – “तुम जहाँ धर्म सन्देश देने जाओगे यदि उन लोगों ने तुम्हारी बात को न माना तब तुम क्या करोगे."


     शिष्य ने विनीत भाव से कहा – भगवान माने न माने सुन तो लेंगे आप के सन्देश को .


     बुद्ध  ने कहा – यदि सुन कर वे क्रोधित हो उठेंगे तो तुम क्या करोगे .


     शिष्य बोला – क्रोधित हो जाएँगे हमे मारेंगे तो नहीं


     बुद्ध ने पूछा –मारने लगेंगे तब क्या करोगे ?


     शिष्य बोला- मारेंगे ही न ! जान से तो नहीं मार डालेंगे.


     बुद्ध ने कहा – यदि उन्होंने तुम्हे जान से मार डाला तो?


     शिष्य बोला – मुझसा भाग्यशाली कौन होगा कि मैं भगवन के आदेशों का पालन करता हुआ जीवन व्याप्त कर दूंगा.


     बुद्ध प्रसनन् होकर बोले- तुम धैर्यवान हो तुम्हे सफलता अवश्य मिलेगी.