बलिदान की जीत (Wednesday, May 7, 2014)

एक दिन एक शिकारी शिकार के लिए जंगल में गया | उसने एक हिरण को निशाना बना कर तीर छोड़ा पर वह तीर हिरण को न लगा और एक कबूतर बीच में आ गया | तीर कबूतर को लगा और वह  गिर कर मर गया | शिकारी ने दूसरा तीर चढ़ाया और छोड़ दिया, फिर एक कबूतर बीच में आ गया | इस तरह शिकारी ने सात तीर हिरणों को मारने के लिए चलाए पर सातों बार एक-एक कबूतर बीच में आता गया और मरता गया | शिकारी यह देखकर झुंझला उठा | एक महात्मा उधर से आ रहे थे | उनकी द्रष्टि मरे हुए कबूतरों पर पड़ी वे ठिठक गये और शिकारी से बोले-तुमने किसी जानवर पर तीर चलाए होंगे और ये कबूतर हर बार बीच में आ गए होंगे | शिकारी आश्चर्य से बोला-हां महाराज ! बिलकुल यही बात है | महात्मा की आखों में आँसू आ गए और वे बोले–कल भी कबूतरों ने ऐसा किया था | एक शिकारी आया था उसने भी हिरण को मारना चाहा था पर कबूतरों ने अपने प्राण को त्याग कर उसे बचा लिया | यह पक्षी होकर इतना ज्ञान रखते हैं कि अपना जीवन दूसरों की रक्षा के लिए न्योछावर करते हैं परन्तु हम मानव जीवन को प्राप्त करके भी प्रत्येक दिन दूसरों के जीवन को समाप्त कर देने कि लालसा रखते हैं और करते भी हैं |


महात्मा की बात सुनकर उस क्रूर शिकारी का ह्रदय द्रवित हो उठा और उस दिन से उसने हिंसा करना छोड़ दिया |