चालाक लोमड़ी (Saturday, August 10, 2013)
 किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी जो बहुत ही धूर्त और चालाक थी | जंगल के छोटे मोटे जानवरों को वह अपनी मीठी बातों में फंसा कर उन पर शिकार करने का प्रयत्न करती | कभी-कभी तो उसकी चालाकी समझकर कुछ जानवर भाग निकलते और कभी कभी कुछ बेचारे उसका शिकार बनते | एक दिन गदहा कहीं से घूमता फिरता उस जंगल में पहुंचा | लोमड़ी ने सोचा कि कहीं ऐसा न हो यह गदहा जंगल के छोटे मोटे जानवरों को मेरी चालाकियां समझा दे तो हम कहीं के भी नहीं रहेंगे | अतः उसने सोचा कि क्यों न गदहा से भी दोस्ती का हाथ बढ़ा कर फिर उस का शिकार कर दिया जाय | वह बहुत ही विनम्र भाव में बोली कि भाई तुम्हारा नाम क्या है और कहाँ से और किस प्रयोजन से यहाँ आना हुआ | गदहे ने अपना परिचय बता दिया | लोमड़ी ने कहा कि बड़ा अच्छा हुआ तुम आ गए अब हम तुम एक मित्र की भांति रहेंगे | गधा बिचारा सीधा सादा था उसे छल प्रपंच की बातें आती नहीं थी वह क्या समझता कि लोमड़ी के मन में क्या पक रहा है | 

       एक दिन लोमड़ी कुछ उदास हो कर बैठी | गदहे ने उसे चिन्तित देखा तो पूछा लोमड़ी बहन ! तुम इतनी उदास क्यों हो | लोमड़ी ने और भी उदास मुद्रा बनाकर कहा क्या बताऊं भाई ! मैंने एक पाप किया है उसी की याद करके मुझे पश्चाताप हो रहा है |

      लोमड़ी ने आंखों में आंसू भरकर कहा – कुछ दिन पहले मैं और मेरा लोमड़ सुख से रहते थे एक दिन हम दोनों में एक बात को लेकर बड़ी जोर से झगड़ा हो गया | लोमड़ क्रोध में घर से बाहर निकल गया कुछ देर तो मैं घर में रही | मैंने सोचा कि क्रोध शांत होने पर लोमड़ घर लौट आएगा किंतु वह तो नहीं लौटा लेकिन शेर की दहाड़ सुनाई पड़ने लगी | मैं भाग कर गई कि कहीं शेर मेरे लोमड़ को मार न डाले किंतु मेरे जाते जाते शेर मेरे लोमड़ का शिकार कर चुका था | मुझे भी घर जाने की इच्छा नहीं हुई तब से मैं यहीं पड़ी रहती हूं | इतना कहकर लोमड़ी रोने लगी मैं यही सोचती हूं कि मैंने लड़ाई क्यों की | गदहे ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया और बोला मत दुखी हो बहन ! गल्ती हो ही जाया करती है तुमने जान बूझ कर तो कुछ किया नहीं |

      लोमड़ी ने कहा – भाई तुमने भी कोई पाप किया है कभी तो मुझे बताओ |

      गदहे ने कहा – हां बहन ! एक बार मुझसे भी गल्ती हो गई थी | मैं भी एक धोबी का नौकर था | धोबी रोज कपड़ों की लादी मुझ पर लादता था और घर से घाट और घाट से घर ले जाया करता था | उसके एवज में मुझे घांस पानी मिलता था | एक दिन धोबी के लड़के ने मुझ पर लादी लाद दी और खुद भी बैठकर चला घात की ओर | उस दिन मेरी इच्छा चलने की नहीं हो रही थी मैं अड़ गया | लड़के ने पुचकारा किंतु मई अड़ा रहा वह गुस्से में उतर कर मुझे मारने चला मैंने वह पैर फटकारा कि उसकी लादी भी गिर गई और उसे भी चोट आ गई और मैं वहां से चल दिया | मैं भी यही सोचता हूं कि मैंने वह गल्ती क्यों की | लोमड़ी ने गुस्से में भर के कहा नमकहराम जिसका खाता रहा उसी का काम करने में आनाकानी की तेरी शक्ल भी देखना पाप है | कह कर वह झपटने को हुई | पहले तो गदहा यह न समझ पाया कि लोमड़ी क्यों एक दम बदल गई | वह रेंकता हुआ भागा लोमड़ी ने उसका पीछा किया |

      गदहे का रेंकना सुनकर जंगल के और जानवर आए | जब लोमड़ी और उसको भागते देखा तो यह कहते हुए भागे कि अरे ! आज लोमड़ी ने अपने लोमड़ की मनगढ़ंत कहानी सुना कर गदहे को अपना शिकार बना लिया |

      गदहे का क्या हुआ यह तो याद नहीं है किंतु लोमड़ी पर से सभी जानवरों का विश्वास उठ गया | वह एक अकेली और निरीह सी घूमने लगी | कहानी समझने की है |

      झूठ बोलकर धोखा दिया जा सकता है किंतु यदि झूठ खुल गया तो उस पर से सब का विश्वास सदा के लिए उठ जाता है|