मुर्दा जी उठा - एक सत्य घटना (Wednesday, May 7, 2014)
 अकबर बादशाह के समय में गोस्वामी जी का काशी में बड़ा विरोध हुआ. लोगों की शिकायत पर अकबर ने उन्हें फतेहपुर सीकरी में बुलवा लिया और महल में कैद किया. गोस्वामी जी ने अनेक चमत्कार दिखाये फिर बीरबल ने बादशाह से कहा कि अगर आप इन्हें नहीं छोड़ते हैं तो आपका नाम निशान मिट जायेगा. फकीरों के इतने चमत्कार देखने के बाद भी आपको समझ नहीं आई फिर भगवान ही मालिक है.

      अकबर होशियार था और हर प्रकार से अपनी तसल्ली करना चाहता था. अंदर ही अंदर उसे भय होने लगा कि गोस्वामी जी के कारण उसे कोई नुक्सान न उठाना पड़े. उसने हर प्रकार की सुविधा दे रखी थी खैर एक दिन की बात है कि अकबर बादशाह अपने मंत्रियों के साथ गोस्वामी जी के महल में पहुंचे और बात करने लगे. मांस मछली खाने पीने की चर्चा होने लगी. गोस्वामी जी ने अकबर से कहा कि सभी रुहें उस खुदा की हैं और किसी रूह को आपने सताया तो खुदा रूठ जायेगा और सजा देगा.

      गोस्वामी जी ने आगे कहा कि जब किसी को आप जिंदा नहीं कर सकते हैं तो मारने का कोई अधिकार नहीं है. संयोग वश यह वार्ता हो ही रही थी कि सामने ही एक कबूतर आया और दम तोड़ दिया. यह देखकर गोस्वामी जी ने कहा कि देखो यह कबूतर है क्या आप इसे जिंदा कर सकते हैं ? अकबर चुप थे. थोड़ी देर बाद बोले कि इसका जिन्दा होना मुश्किल है क्योंकि यह मर चुका है. यदि आप इसे जिंदा कर दें तो समझूं. गोस्वामी जी ने कहा कि ठीक है पहले हकीम को दिखा दें कि अभी नब्ज तो नहीं है. हकीम बुलाये गये और जाँच होने के बाद उन्होंने बताया कि कबूतर मर चुका है.

      अब गोस्वामी जी ने प्यार भरे स्वर में कबूतर की तरफ देखते हुये कहा कि अरे भाई यहाँ क्यों पड़े हो. जल्दी उठो. इतना कहना ही था कि कबूतर में हरकत हुई और वह उड़ गया.

      अकबर हैरान था. उसकी बुद्धि काम नहीं कर रही थी. उसने हाथ जोड़कर कहा कि फकीर साहेब मुझे माफ कीजियेगा. मैंने आपको जाना नहीं. आप शहन्शाहों के भी शहन्शाह हैं और सारी दुनिया में आज़ाद हैं. आपको कोई कैद नहीं कर सकता है. फिर कहता हूं कि मुझे माफ कीजियेगा और अब आप आजाद हैं.